Sunday, October 2, 2022
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बकरीद पर निबंध 2021 || Bakrid par nibhandh in hindi || bakrid kab hai 2021 me

  1. Bakrid begins

    Monday, July 19, 2021

    and ends

    Tuesday, July 20, 2021


बकरीद क्या है ? 



हर धर्मो में अलग -अलग तरह के त्यौहार मनाये जाते है उसी तरह मुस्लिम धर्म में भी पहले ३० दिन के रोजे के बाद ईद उल फितर का त्यौहार मनाया जाता  है और फिर ईद उल फितर के 70 दिनों  के बाद ईद -उल -जुहा का त्यौहार मनाया जाता है जिसे मुस्लिम धर्म में बकरीद के नाम से जानते है इस दिन को मुस्लिम धर्म का  बकरीद मुस्लिम धर्म में बहुत अच्छा और नेक आमाल  माना जाता है ये मुस्लिम धर्म का बहुत पवित्र त्यौहार मनाया जाता है 

बकरीद क्यों ? मनाया जाता है 

इस पवित्र त्यौहार बकरीद को मुस्लिम  धर्म में क्यों किया जाता  है तो हम आप को बताते चले की मुस्लिम धर्म के किताबो से इस बात का पता चलता है की ये हजरते इब्ररहीम अलैहिस  सलाम की सुनत है ये हजरते इब्राहिम अलैहिस सलाम की सुनत इस लिए है की हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अपने प्यारे बेटे हजरते इस्माइल अलैहिस सलाम को  राजी हो गये थे 

उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे खुदा के हुक्म के मुताबिक अपने बेटे को खुदा की राह में कुर्बान करने को तैयार थे हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम पर खुदा की  तरफ से इम्तेहान लिया गया था इस इम्तेहान में हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम कामयाब हुए थे 

और तब से इस दिन को मुस्लिम धर्म में बकरीद के नाम से किया  जाता है इस दिन हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम के सुनत पर अमल करते हुए जिस तरह हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम ने खुदा के राह में क़ुरबानी पेश कि थी उसी तरह मुस्लिम धर्म के लोग भी अपने -अपने घरो पर जानवर की क़ुरबानी खुदा की राह में पेश करते है 

बकरीद के दिन क्या -क्या ?होता है  खास होता है 

इस पवित्र त्योहर ईद उल जुहा के दिन लोग आपस में ख़ुशी का इजहार करते है और इस पविर त्यौहार की  दिन लोग शुबह उठने के बाद शुबह की नमाज़ को अदा करते है और स इस दिन में  रोजा भी रखते है इस रोजे को मुस्लिम धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है इस दिन सभी छोटे बरे रोजे से रहते है और फिर तब तक रोजे से रहते है जब तक ईद गाह से वापस न आ जाये तब तक के लिए रोजा रखते है इसे मुस्लिम धर्म में बहुत अच्छा और पवित्र माना जाता है और सभी लोग एक साथ होकर ईद गाह के तरफ चलते है

 ईद गाह पहुच कर ईद उल जुहा की नमाज़ को अदा करते फिर सभी लोग ईद गाह से एक साथ वापस आते है और इस  दिन सबसे खास बात ये है की लोग ईद गाह से आने के बाद एक -एक करके  सभी अपने -अपने घरो पर जानवर की क़ुरबानी खुदा के राह में पेश करते है फिर क़ुरबानी हो जाने के बाद उस जानबर के गोस्त को सभी मुस्लिम भाई एक दुसरे के घर पर थोरा -थोरा तकसीम करते है इसे भी मुस्लिम धर्म में पवित्र माना जाता  है इस तकसीम किये हुए गोस्त को बरे ही अदब के साथ खाते है इसे मुस्लिम धर्म में त्ब्बरुक माना जाता है 

बकरीद में कौन -कौन से जानबर की क़ुरबानी पेश की जाती है 

मुस्लिम धर्म के किताबो से इस बात का पता चलता है की क़ुरबानी में उसी जानबर को खुदा की राह में क़ुरबानी पेश की जाती है जिसे मुस्लिम धर्म में हलाल करार दिया गया है जिसे मुस्लिम धर्म की किताबो में जायज समझा गया  है उसी जानबर को मुस्लिम धर्म के लोग क़ुरबानी पेश करते है और उसी जानबर को मुस्लिम धर्म में हलाल माना जाता है 

जैसे बकरा ,ऊट ,और भी बहुत सारे जानबर है जिसे मुस्लिम धर्म में हलाल करार दिया गया है और बहुत सारे ऐसे भी जाबर है जिसे मुस्लिम धर्म में हराम यानि जायज करार नही दिया गया है जैसे कुत्ता ,बिल्ली ,शेर ,घोरा  इस तरह के और भी बहुत सारे जानबर है जिसे मुस्लिम धर्म में जायज नही माना जाता है 

इस तरह के जानबरो की क़ुरबानी मुस्लिम धर्म में जायज नही समझी जाती है इस लिए मुस्लिम धर्म में सिर्फ उन्ही जानबरो की कुर्बानी पेश की जाती है जो मुस्लिम धर्म में जायज होती है जायज जानबर के गोस्त को ही मुस्लिम धर्म में खाना जायज होता है नजायज जानबर का गोस्त खाना मुस्लिम धर्म में हराम माना जाता है और नजायज जानबर की क़ुरबानी भी जायज नही मानी जाती है ये मुस्लिम धर्म में सख्ती के तौर पर नजायज माना गया है 

बकरीद का इतिहास 

 मुस्लिम धर्म की किताबो से इस बकरीद का इतिहास इस तरह है की मुस्लिम धर्म में इस त्यौहार को हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत मानी जाती है जब 90वर्ष की उम्र मे हजरते इब्राहीम  अलैहिस सलाम को कोई भी औलाद नही हुए थे फिर हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अल्लाह पाक के बारगाह में दुआ की फिर अल्लाह पाक ने अपने पयगम्बर की दुआ कबूल की और उन्हें एक नेक बेटा अता किया जिनका नाम इस्माइल रखा गया आप अपने प्यारे बेटे इस्माइल से काफी मुहब्बत करते थे 

बकरीद का इतिहास 


एक दिन हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम के ख्वाब में रब का फरमान हुआ अये इब्राहीम तुम सबसे अजीज चीज की कुबानी पेश करो अगले दिन आपने एक जानबर की क़ुरबानी दी फिर ख्वाब में रब का फरमान हुआ अये इब्राहीम तुम सबसे प्यारी चीज की क़ुरबानी दो आप के नगदिक उस वक्त सबसे अजीज चीज आपका प्यारा बीटा इस्माइल था आपने अपने प्यारे बेटे इस्माइल की कुर्बानी करने के लिए अपने आपको राजी कर लेते है फिर आपने अपने बीबी हाजरा को हुक्म दिया अये हाजरा तुम मेरे बेटे इस्माइल को अच्छे तरह से नहेला कर अच्छे लिबास पहेना दो और खुशबू लगा दो आप के हुक्म के मुताबिक हजरते हाजरा ने आपने प्यारे से बेटे इस्माइल को अच्छे से नहेला कर नये कपरे पहेना देती है

बकरीद का इतिहास 

 फिर हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम ने अपने प्यारे बेटे को ले कर घर से निकल परते है कुछ देर के बाद शैतान हज़रते हाजरा के पास पहुचता है और उन्हें भटकाने की कोशिश करता है लेकिन हजरते हाजरा उस शैतान की बात में नही आती है फिर वो शैतान वहा से निकल जाता है और हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम के पास पहुचता है और उन्हें भी भटकाने की कोशिश करता लेकिन वहा पर भी शैतान को हार का सामना करना परता है आखिर में वो हजरते हजरते इस्माइल के पास पहुचता है 

बकरीद का इतिहास 

और उन्हें फसाने की बहुत कोशिश करता है लेकिन इस्माइल अलैहिस सलाम उस शैतान की बातो में नही आते है और आगे बढ़ते चले जाते है फिर जब वो अपने आखिर मुकाम पर पहुचते है तब पहुचने के बाद आप हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम अपने प्यारे बेटे इस्माइल को पूरी बाते बता देते है फिर आप अपने प्यारे बेटे इस्माइल को क़ुरबानी देने के लिए जमीन पर लिटा देते है 

बकरीद का इतिहास 

और अपने बेटे के कहने के मुताबिकआप अपने आँखों में पट्टी बांध लेते है फिर जब छुरी चलाते है तब छुरी काम करना बंद कर देती है उसी वक्त अल्लाह पाक अपने फ़रिश्ते जिब्रील को हुक्म देते है अये जिब्रील जाओ और जन्नत से एक दुम्बा ले लो और इस्माइल की जगह पर जाकर रख दो हजरते जिब्रिल जल्दी से एक दुम्बा लेकर इस्माइल के जगह पर जाकर रख देते है और फिर छुरी चलना शुरू हो जाती है 

बकरीद का इतिहास 

और कुर्बानी हो जाती है जब हजरते इब्राहीम अलैहिस सलाम की नजर अपने प्यारे बेटे इस्माइल पर परती और आप अपने बेटे को जिन्दा देख कर काफी खुश होते है तब से आज तक इस क़ुरबानी के त्यौहार पर लोग हलाल जानबर की क़ुरबानी पेश करते है इस कुर्बानी को लोग ईद उल जुहा के नाम से भी जानते है 

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